आज की वाणी

?आज की वाणी?

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अतृणे पतितो वह्नि:
स्वयमेवोपशाम्यति ।
अक्षमावान् परं दोषै-
रात्मानं चैव योजयेत्।।

अर्थात्?

जैसे तिनकों से रहित भूमि पर पड़ी आग स्वयं बुझ जाती है, वैसे ही क्षमाशील व्यक्ति पर क्रोध करने वाले का क्रोध स्वयं शान्त हो जाता है।इसके विपरीत जो क्षमाशील नहीं हैं, वह अनेक त्रुटियों से अपने आप को भरपूर कर लेता है।
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